ज्योतित हो जन-जन का जीवन की मूल भावना से अभिभूत होकर स्थापना वर्ष ।96] से लेकर अब तक की एक लंबी यादगार सुखद समयावधि में हिंदीतर प्रदेशों एवं विदेशों के हज़ारों विद्यार्थियों को हिंदी भाषा में प्रशिक्षित करने की अलौकिक उपलब्धि केंद्रीय हिंदी संस्थान ने प्राप्त की है तथा हिंदी को विश्वभर में एक स्वतंत्र पहचान दिलाने में संस्थान की महती भूमिका रही है।
प्रत्येक वर्ष विभिन्न देशों के विद्यार्थी हिंदी अध्ययन के लिए संस्थान में अध्ययन करने आते हैं जिसके कारण संस्थान का स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी सभागार “लघु भारत' और ल्रघु विश्व' का प्रतिनिधित्व करता है। हिंदी के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में केंद्रीय हिंदी संस्थान हमेशा से एक अनूठी पहचान रखता है तथा इसी पहचान में श्रीवृद्धि करते हुए संस्थान को भारत सरकार द्वारा “विशिष्ट श्रेणी का मानद विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया गया है।
हिंदी को वैश्विक स्तर पर सर्वसमावेशी बनाने के लिए तथा हिंदी भाषा और साहित्य के माध्यम से संपूर्ण विश्व को भारतीय ज्ञान परंपरा से अवगत कराने हेतु संस्थान सदैव प्रयत्नशील रहेगा।
संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की शुअकामनाओं सहित।