दिल्ली केंद्र की स्थापना वर्ष 1970 में हुई। सर्वप्रथम राजभाषा क्रियान्वयन योजना के लिए केंद्रीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए गहन हिंदी शिक्षण कार्यक्रम और विदेशों में हिंदी प्रचार-प्रसार के अंतर्गत विदेशियों के लिए हिंदी शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए। कार्याधिक्य के कारण वर्ष 1991 में विदेशियों के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम की छात्रवृत्ति आधारित योजना आगरा मुख्यालय में स्थानांतरित कर दी गई।
वर्तमान में दिल्ली केंद्र में स्ववित्त पोषित योजना के अंर्तगत विदेशियों के लिए हिंदी पाठ्यक्रम, सांध्यकालीन पोस्ट एम.ए. अनुप्रयुक्त हिंदी भाषाविज्ञान डिप्लोमा, पोस्ट एम.ए. अनुवाद सिद्धांत एवं व्यवहार डिप्लोमा तथा पोस्ट एम.ए. जनसंचार एवं पत्रकारिता पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश (आदिवासी क्षेत्र) राज्यों के स्कूल एवं कॉलेज स्तर के हिंदी अध्यापकों के लिए 12 दिवसीय नवीकरण पाठ्यक्रमों का आयोजन भी दिल्ली केंद्र द्वारा किया जाता है।
1970 में संस्थान ने दिल्ली में अपने एक परिसर की स्थापना की, जिसे बाद में दिल्ली केंद्र के रूप में मान्यता मिली। 1969 में शिक्षा मंत्रालय में भाषा वैज्ञानिकों की राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई थी, जिसमें यह प्रस्ताव रखा गया था कि भारत सरकार के वरिष्ठतम अधिकारियों के लिए, विशेष रूप से ‘तीन महीने का गहन हिंदी शिक्षण’ कार्यक्रम प्रारंभ किया जाए क्योंकि वरिष्ठ अधिकारी अपने कार्यो को छोड़कर हिंदी-शिक्षण योजना की कक्षाओं में जा नहीं पाते। इस संदर्भ में मंत्रालय ने संस्थान से कहा कि वह इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए तीन महीने की अवधि के गहन हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम की योजना प्रस्तुत करे और दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्था करे।
कनिष्ठ आशुलिपिक
उच्च श्रेणी लिपिक
उच्च श्रेणी लिपिक (मंत्रालय)
लघु श्रेणी लिपिक
लघु श्रेणी लिपिक (तदर्थ)
लघु श्रेणी लिपिक (तदर्थ)
वाहन चालक (तदर्थ )
एम.टी.एस
एमटीएस
लिपिक(अनु.)
निजि सहायक (को-टर्मिनस)
एम.टी.एस (को-टर्मिनस)
परियोजना सहायक (अनु.)
अकादमिक सहायक (अनु.)
प्रधान संपादक के सहायक (अनु.)
लिपिक (अनु.)
केंद्र द्वारा उत्तर भारत स्थित हिंदीतर राज्यों (पंजाब, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश आदिवासी एवं लद्दाख क्षेत्र) के सेवारत हिंदी अध्यापकों के लिए नवीकरण कार्यक्रम चलाए जाते हैं |
केंद्र पर सन 2004 से हिंदी विश्वकोश परियोजना के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर कोष निर्माण का कार्य जारी है |
केंद्र से जनसंचार एवं पत्रकारिता केन्द्रित त्रैमासिक पत्रिका ‘संवाद पथ’ का नियमित प्रकाशन किया जाता है | अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की पत्रिका ‘हिंदी विश्व भारती’ का प्रकाशन भी प्रतिवर्ष किया जा रहा है |